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लघुकथाएं | Hindi Short Stories | प्यार की भूख | Dr. M.K. Mazumdar

‘प्यार की भूख’ डाॅ. एम.के. मजूमदार द्वारा लघुकथा संग्रह में से एक है। इनकी लघुकथाएं देश के विभिन्न पत्रिकाओं और पेपर में प्रकाशित हो चुकी है। कल और आज के परिवेश में काफी बदलाव आया है। हो सकता है कुछ लघुकथाएं वर्तमान समय में अटपटी लगे पर अनेक लघुकथाएं आज के सदंर्भ में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं जितनी की उस वक्त. लघुकथा के परिवेश और काल को समझने के लिए प्रत्येक लघुकथा के लेखन के वर्ष को भी दर्शाया गया है जिससे पाठक उस काल को ध्यान में रखकर लघुकथा की गहराई को महसूस कर सकें। आप भी इन्हें पढ़े और अपने विचार कमेंट बाॅक्स में जरूर लिखें।




प्यार की भूख


विवेक जब भी मिलता, कहता, ‘‘कब शादी कर रही हो?’’

वह जबाव देती, ‘‘अभी नहीं, पढ़ायी पूरी करने पर।’’

‘‘मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता, एक-एक पल बिताना मुश्किल है।’’

वह सोचती, ‘यह मेरेे जिस्म का भ्ूाखा है ....। क्या शादी के बिना प्रेम नहीं हो सकता?’

उसने विवेक से शादी करने से साफ इंकार कर दिया। ...... उसने दुसरे से शादी रचा ली। उसका पति मध्यमवर्ग का ..... अच्छे परिवार से है। ..... वह दफ्तर के फाइलों में डूबा रहता ...... उसे प्रेम की दो टूक बात करने का होश नहीं रहता ....।

अब उसे एहसास हो रहा था...... विवेक उसके जिस्म से नहीं उससे सच्चा प्यार करता था।........ More



(1989)



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