![]() |
| लघुकथाएं | Hindi Short Stories | दहेज | Dr. M.K. Mazumdar |
लघुकथाएं | Hindi Short Stories | दहेज | Dr. M.K. Mazumdar
‘दहेज’ डाॅ. एम.के. मजूमदार द्वारा लघुकथा संग्रह में से एक है। इनकी लघुकथाएं देश के विभिन्न पत्रिकाओं और पेपर में प्रकाशित हो चुकी है। कल और आज के परिवेश में काफी बदलाव आया है। हो सकता है कुछ लघुकथाएं वर्तमान समय में अटपटी लगे पर अनेक लघुकथाएं आज के सदंर्भ में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं जितनी की उस वक्त. लघुकथा के परिवेश और काल को समझने के लिए प्रत्येक लघुकथा के लेखन के वर्ष को भी दर्शाया गया है जिससे पाठक उस काल को ध्यान में रखकर लघुकथा की गहराई को महसूस कर सकें। आप भी इन्हें पढ़े और अपने विचार कमेंट बाॅक्स में जरूर लिखें।
दहेज
पोपले मुंह के दादी मां से सात वर्षीय अनूप ने पूछा, ‘‘दादी मां, दहेज क्या होता है?’’
दादी मां ने कहा, ‘‘प्यारे बच्चे, तुम जब बड़े हो जाओगे। तुम्हारी जब शादी होगी तो ढ़ेर सारा सामान मिलेगा। टी.वी., फ्रीज, मोटर साइकिल ....... उसे दहेज कहते हैं।’’
यह सूनकर अनूप खुश हो गया।
इतने में पांच वर्षीय पिंकी दादी मां के पास आयी। उसने भी दादी से पूछा, ‘‘दादी मां, दहेज क्या होता हैं?’’
दादी मां ने तेज निश्वास लेकर कहा, ‘‘काश! मैं तुझे समझा पाती, दहेज क्या होता है? ..... दहेज लड़कियों के लिए आग होती है.....आग।’’
दादी मां की आंखें नीचे की ओर धंसती हुयी महसूस हुई।
दादी मां के साथ-साथ पिंकी भी परेशान हो गयी।........ More (1980)
लघुकथाएं | Hindi Short Stories | दहेज | Dr. M.K. Mazumdar | laghu katha | M.K. Majumdar | संकलन | लघुकथा संग्रह | Inspirational Stories | Hindi| Short Stories | Perak Kahani | Hindi Sahitya | maanoj mantra | manoj kumar | हिंदी लघु-कथाएं | Short story | लघु कहानी | लघुकथा | साहित्य कथा | साहित्य लघु कहानी हिन्दी में
Read This :-
Women Business Business Ideas Online Business Low Budget Manufacturind Business

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.