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लघुकथाएं | Hindi Short Stories | प्रकृति का अन्याय | Dr. M.K. Mazumdar
‘प्रकृति का अन्याय’ डाॅ. एम.के. मजूमदार द्वारा लघुकथा संग्रह में से एक है। इनकी लघुकथाएं देश के विभिन्न पत्रिकाओं और पेपर में प्रकाशित हो चुकी है। कल और आज के परिवेश में काफी बदलाव आया है। हो सकता है कुछ लघुकथाएं वर्तमान समय में अटपटी लगे पर अनेक लघुकथाएं आज के सदंर्भ में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं जितनी की उस वक्त. लघुकथा के परिवेश और काल को समझने के लिए प्रत्येक लघुकथा के लेखन के वर्ष को भी दर्शाया गया है जिससे पाठक उस काल को ध्यान में रखकर लघुकथा की गहराई को महसूस कर सकें। आप भी इन्हें पढ़े और अपने विचार कमेंट बाॅक्स में जरूर लिखें।
प्रकृति का अन्याय
विभिन्न पिंजड़ों में नाना प्रकार के पक्षियों को ले जाते देख उसने उससे पूछा, ‘‘इनका क्या कसूर ..... जो इन्हें बंद करके रखे हो?
‘‘साब, यह देखने में सुंदर ....... आवाज़ इनकी सुरीली ..... और नाचती भी बहुत बढ़िया हैं।’’
उसकी बात सुनकर वह सोचने लगा, प्रकृति ने इन मासूमों के साथ कितना बड़ा अन्याय किया है।....... More (1982)
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