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| लघुकथाएं | Hindi Short Stories | पन्द्रह अगस्त | Dr. M.K. Mazumdar |
लघुकथाएं | Hindi Short Stories | पन्द्रह अगस्त | Dr. M.K. Mazumdar
‘पन्द्रह अगस्त’ डाॅ. एम.के. मजूमदार द्वारा लघुकथा संग्रह में से एक है। इनकी लघुकथाएं देश के विभिन्न पत्रिकाओं और पेपर में प्रकाशित हो चुकी है। कल और आज के परिवेश में काफी बदलाव आया है। हो सकता है कुछ लघुकथाएं वर्तमान समय में अटपटी लगे पर अनेक लघुकथाएं आज के सदंर्भ में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं। लघुकथा के परिवेश और काल को समझने के लिए प्रत्येक लघुकथा के लेखन के वर्ष को भी दर्शाया गया है जिससे पाठक उस काल को ध्यान में रखकर लघुकथा की गहराई को महसूस कर सकें। आप भी इन्हें पढ़े और अपने विचार कमेंट बाॅक्स में जरूर लिखें।
पन्द्रह अगस्त
गांव का मुखिया कलफ चढ़ी सफेद खादी की धोती-कुर्ता और गांधी टोपी लगा कर हवेली से निकले। इतने में उनका बंधुआ मजदूर दुखिया ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘मालिक, आज आप कहां जा रहे है?मुखिया ने बड़े रोब से कहा, ‘‘आज 15 अगस्त है .... स्कूल में झण्डा फहराने जा रहा हूं।’’
‘‘मालिक..... इ 15 अगस्त क्या हैं..... ?
‘‘अरे, बेवकूफ तुझे इतना भी नहीं मालूम, 15 अगस्त को हमारा देश गुलामी की जंजीर से आजाद हुआ था।’’ कहते हुए मुखिया तेज कदमों से आगे बढ़ गया।
दुखिया जड़वत्त खड़ा सोच रहा था, ‘15 अगस्त को देश तो आजाद हो गया .... लेकिन हमरे लिए 15 अगस्त कब आयेगा?......More (1980)
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– पार्ट–2
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